एक रेडियोधर्मी नाभिक प्रारंभ में स्थिर अवस्था में है। यह एक इलेक्ट्रॉन और एक न्यूट्रिनो को एक-दूसरे के लंबवत उत्सर्जित करके क्षयित होता है। इलेक्ट्रॉन का संवेग $3.2 \times 10^{-23} \ kg \cdot m/s$ है और न्यूट्रिनो का संवेग $6.4 \times 10^{-23} \ kg \cdot m/s$ है। इलेक्ट्रॉन की गति की दिशा के सापेक्ष नाभिक के प्रतिक्षेप (recoil) की दिशा क्या होगी?

  • A
    $\tan^{-1}(0.5)$
  • B
    $\tan^{-1}(2)$
  • C
    $\pi - \tan^{-1}(2)$
  • D
    $\frac{\pi}{2} + \tan^{-1}(2)$

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$Z$ प्रोटॉन और $N$ न्यूट्रॉन वाला एक रेडियोधर्मी नाभिक एक $\alpha$-कण,$2\beta^-$-कण और $2$ गामा किरणों का उत्सर्जन करता है। क्षय के बाद नाभिक में बचे प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या क्रमशः क्या होगी?

पाउली ने $\beta^{+}$ क्षय के दौरान न्यूट्रिनो के उत्सर्जन का सुझाव क्यों दिया?

कथन: कोबाल्ट-$60$ कैंसर के उपचार में उपयोगी है।
कारण: कोबाल्ट-$60$ $\gamma$-विकिरणों का एक स्रोत है जो कैंसर कोशिकाओं को मारने में सक्षम है।

जब एक न्यूट्रॉन का विघटन होकर $\beta$-कण प्राप्त होता है,तो निम्नलिखित में से क्या उत्सर्जित होता है?

जब यूरेनियम ${}_{92}U^{238}$ का क्षय होकर लेड ${}_{82}Pb^{206}$ बनता है,तो कितने अल्फा और बीटा कण उत्सर्जित होते हैं?

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