शून्य फोटोइलेक्ट्रिक धारा के लिए निरोधी विभव (stopping potential) है:

  • A
    आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के समानुपाती होता है।
  • B
    आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बढ़ने पर बढ़ता है।
  • C
    आपतित प्रकाश की आवृत्ति के समानुपाती होता है।
  • D
    आपतित प्रकाश की आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ता है।

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$E$ ऊर्जा का प्रकाश $\frac{E}{3}$ कार्य फलन वाली धातु पर लंबवत गिरता है। फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा $K$ है

धातु का कार्य फलन (work function) ......... है।

कथन : प्रकाशवैद्युत उत्सर्जन की प्रक्रिया में, सभी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा समान नहीं होती है।
कारण : यदि किसी धातु की प्रकाश-संवेदी सतह पर गिरने वाले विकिरण में अलग-अलग तरंगदैर्ध्य शामिल हैं, तो अलग-अलग तरंगदैर्ध्य के फोटॉन को अवशोषित करने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त ऊर्जा अलग-अलग होगी।

जब धातु पर गिरने वाले विकिरण की तरंग दैर्ध्य $500 \, nm$ से बदलकर $200 \, nm$ कर दी जाती है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा तीन गुना हो जाती है। धातु का कार्य फलन (work function) लगभग $..... \, eV$ है।

जब $3000 \ \mathring{A}$ तरंगदैर्घ्य का फोटॉन धातु की सतह पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा $0.5 \ eV$ होती है। यदि $2000 \ \mathring{A}$ तरंगदैर्घ्य का फोटॉन उसी धातु की सतह पर आपतित हो,तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होगी:

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