निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

  • A
    $FeCl_3$ का उपयोग फिनोल के परीक्षण में किया जाता है।
  • B
    फेलिंग विलयन का उपयोग ग्लूकोज के परीक्षण में किया जा सकता है।
  • C
    टोलेंस अभिकर्मक का उपयोग असंतृप्ति (unsaturation) का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  • D
    $NaHSO_3$ का उपयोग कार्बोनिल यौगिकों के परीक्षण में किया जाता है।

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कथन : बेंज़ल्डिहाइड,न्यूक्लियोफिलिक आक्रमण के प्रति इथेनॉल की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है।
कारण : फेनिल समूह का $-I$ और $+R$ प्रभाव बेंज़ल्डिहाइड में $>C=O$ समूह के कार्बन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करता है।

List-$I$ में दी गई अभिक्रियाओं को List-$II$ में उनके संबंधित अंतिम उत्पादों के साथ सुमेलित करें:
List-$I$ (अभिक्रिया का प्रकार)List-$II$ (अंतिम उत्पाद)
$A$. राइमर-टीमैन अभिक्रिया$I$. क्लोरोबेंजीन
$B$. एटार्ड अभिक्रिया$II$. सैलिसिलल्डिहाइड
$C$. सैंडमेयर अभिक्रिया$III$. बेंजल्डिहाइड
$D$. फ्रिडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया$IV$. एसीटोफेनोन

सही उत्तर है:

उपरोक्त यौगिकों को निम्नलिखित अभिकर्मक द्वारा विभेदित किया जा सकता है:

एसिटाल्डिहाइड इनमें से कौन सा परीक्षण नहीं दिखा सकता है?

एक एल्कीन $(A)$ $C_{16}H_{16}$ का ओजोनोलिसिस करने पर केवल एक उत्पाद $(B)$ $C_8H_8O$ प्राप्त होता है। $(B)$ को साइनोबेंजीन और $CH_3MgBr$ के बीच अभिक्रिया से प्राप्त उत्पाद के जल-अपघटन द्वारा भी प्राप्त किया जा सकता है। $(A)$ ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करता है और यह $Br_2$ जल को रंगहीन कर देता है। $(B)$ की $SeO_2$ के साथ अभिक्रिया से $(C)$ प्राप्त होता है। $(B)$ के बारे में कौन सा कथन सही नहीं है?

Difficult
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