कमरे के तापमान पर,$360 \ g$ पानी में $0.60 \ g$ यूरिया घोलकर यूरिया का एक तनु विलयन तैयार किया जाता है। यदि इस तापमान पर शुद्ध पानी का वाष्प दाब $35 \ mm \ Hg$ है,तो वाष्प दाब में अवनमन ............. $mm \ Hg$ होगा (यूरिया का मोलर द्रव्यमान $= 60 \ g \ mol^{-1}$)

  • A
    $0.027$
  • B
    $0.031$
  • C
    $0.028$
  • D
    $0.017$

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वाष्प दाब को $75\%$ तक कम करने के लिए $114 \ g$ ऑक्टेन में घोले जाने वाले अवाष्पशील,गैर-विद्युत अपघट्य विलेय (मोलर द्रव्यमान $= 50 \ g \ mol^{-1}$) का द्रव्यमान ............. $g$ है।

$3 \ g$ यूरिया को $45 \ g$ पानी में घोला जाता है। वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन है

$373 \ K$ पर ग्लूकोज के एक तनु जलीय विलयन का वाष्प दाब $750 \ mm$ मरकरी है। विलायक का मोल अंश है

शुद्ध द्रव विलायक का वाष्प दाब $0.50 \ atm$ है। जब विलायक में एक अवाष्पशील विलेय $B$ मिलाया जाता है,तो इसका वाष्प दाब घटकर $0.30 \ atm$ हो जाता है। विलेय $B$ का मोल अंश $......$ है।

कथन $:-$ सतह का क्षेत्रफल बढ़ाने पर द्रव का वाष्प दाब बढ़ जाता है।
कारण $:-$ द्रव के वाष्पीकरण की दर सतह के क्षेत्रफल के सीधे समानुपाती होती है।

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