अम्ल की प्रबलता को प्रभावित करने वाले कारकों की उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।

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(N/A) अम्ल की प्रबलता उसके $H^+$ आयनों को दान करने की क्षमता द्वारा निर्धारित होती है।
$(i)$ बंध प्रबलता: जैसे-जैसे $H-A$ बंध की प्रबलता घटती है,बंध को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा कम हो जाती है,जिससे $HA$ एक प्रबल अम्ल बन जाता है।
$(ii)$ बंध ध्रुवीयता: जैसे-जैसे $H$ और $A$ के बीच विद्युत ऋणात्मकता का अंतर बढ़ता है,बंध अधिक ध्रुवीय हो जाता है,जिससे $H^+$ का निकलना आसान हो जाता है। अतः,$\text{ध्रुवीयता} \propto \text{अम्लीयता}$.
$(iii)$ आवर्त में प्रवृत्ति: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर $A$ की विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है,जिससे बंध की ध्रुवीयता बढ़ती है। उदाहरण के लिए: $CH_4 < NH_3 < H_2O < HF$। यहाँ,$A$ की विद्युत ऋणात्मकता बढ़ने के साथ अम्ल की प्रबलता बढ़ती है।
$(iv)$ समूह में प्रवृत्ति: समूह में ऊपर से नीचे जाने पर $A$ का आकार बढ़ता है,जिससे $H-A$ बंध की प्रबलता काफी कम हो जाती है। यह प्रमुख कारक है। उदाहरण के लिए: $HF < HCl < HBr < HI$। यहाँ,$A$ का आकार बढ़ने के साथ अम्ल की प्रबलता बढ़ती है।

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