यंग के द्वि-झिरी (डबल-स्लिट) प्रयोग,इसकी प्रायोगिक व्यवस्था और यह व्यतिकरण पैटर्न कैसे उत्पन्न करता है,समझाइए।

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(N/A) ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी थॉमस यंग ने तरंगाग्र के विभाजन द्वारा कला-संबद्ध (coherent) स्रोत प्राप्त करने के लिए एक सरल तकनीक तैयार की और एक स्थिर व्यतिकरण पैटर्न का प्रदर्शन किया।
यंग के प्रयोग की प्रायोगिक व्यवस्था चित्र $(a)$ में दिखाई गई है।
$S$ स्क्रीन $A$ पर एक छोटा छेद (स्रोत) है। $S_1$ और $S_2$ स्क्रीन $A$ के समानांतर स्क्रीन $B$ पर दो संकीर्ण पिनहोल हैं। दूरियाँ $SS_1 = SS_2$ हैं। स्क्रीन $A$ और स्क्रीन $B$ के बीच की दूरी बहुत कम ($mm$ के क्रम में) है। $C$ स्क्रीन $B$ के समानांतर एक स्क्रीन है,जिसे $D$ दूरी (मीटर के क्रम में) पर रखा गया है।
छेद $S$ को एक चमकदार प्रकाश स्रोत द्वारा प्रकाशित किया जाता है। प्रकाश $S$ से फैलता है और $S_1$ और $S_2$ दोनों पर गिरता है। चूँकि दूरियाँ $SS_1$ और $SS_2$ समान हैं,इसलिए $S_1$ और $S_2$ तक पहुँचने वाली प्रकाश तरंगें समान कला (phase) में होती हैं।
चूँकि $S_1$ और $S_2$ से निकलने वाली प्रकाश तरंगें एक ही मूल स्रोत से प्राप्त होती हैं,इसलिए स्रोत $S$ में होने वाला कोई भी अचानक कला परिवर्तन $S_1$ और $S_2$ से निकलने वाले प्रकाश में समान कला परिवर्तन के रूप में प्रकट होगा।
इस प्रकार,दो स्रोत $S_1$ और $S_2$ कला में बंधे रहते हैं,जिससे वे कला-संबद्ध स्रोत बन जाते हैं। ये कला-संबद्ध तरंगें स्क्रीन $C$ पर अध्यारोपित होकर एक स्थिर व्यतिकरण पैटर्न उत्पन्न करती हैं,जिसमें एकांतर दीप्त और अदीप्त फ्रिंजें दिखाई देती हैं।

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$YDSE$ में,दो अलग-अलग तरंगदैर्ध्य $(\lambda_1, \lambda_2)$ का प्रकाश स्लिट के तल पर लंबवत आपतित होता है। $\lambda_1$ का $n^{th}$ उच्चिष्ठ,$\lambda_2$ के $m^{th}$ उच्चिष्ठ के साथ एक स्लिट के ठीक सामने संपाती होता है। यदि $D = 1.5 \ m$,$d = 3 \ mm$,और $4500 \ \mathring{A} < \lambda_1, \lambda_2 < 7000 \ \mathring{A}$ है,तो $n, m$ और $\lambda_1$ क्या हैं?

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यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में, $1 \, m$ की दूरी पर स्थित पर्दे पर $6000 \, \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग करके व्यतिकरण फ्रिंज प्राप्त की जाती हैं। स्लिटों के बीच की दूरी $1 \, mm$ है। फ्रिंज की चौड़ाई क्या है?

यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में,जब $6000 \, \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है और पर्दा $2.5 \, m$ की दूरी पर होता है,तो फ्रिंज की चौड़ाई $0.8 \, mm$ प्राप्त होती है। यदि इस प्रयोग को $1.6$ अपवर्तनांक वाले द्रव में किया जाए,तो नई फ्रिंज की चौड़ाई.....$mm$ होगी।

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यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग $550 \,nm$ की तरंगदैर्ध्य के लिए किया जाता है। यदि दो स्लिटों के बीच की दूरी $1.10 \,mm$ है और पर्दे तथा स्लिट के बीच की दूरी $1 \,m$ है,तो दो क्रमागत दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी .....$mm$ है।

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