$0.4 \, mH$ स्व-प्रेरकत्व वाली कुंडली में बहने वाली धारा $0.1 \, s$ में $250 \, mA$ बढ़ जाती है। प्रेरित $e.m.f.$ होगा:

  • A
    $+ 1 \, V$
  • B
    $- 1 \, V$
  • C
    $+ 1 \, mV$
  • D
    $- 1 \, mV$

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स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) के संबंध में:
$A:$ कुंडली का स्व-प्रेरकत्व उसकी ज्यामिति पर निर्भर करता है।
$B:$ स्व-प्रेरकत्व माध्यम की पारगम्यता (permeability) पर निर्भर नहीं करता है।
$C:$ स्व-प्रेरित e.m.f. परिपथ में धारा के किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है।
$D:$ स्व-प्रेरकत्व यांत्रिकी में द्रव्यमान का विद्युत-चुंबकीय अनुरूप है।
$E:$ धारा स्थापित करने के लिए स्व-प्रेरित e.m.f. के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

जब धारा $1 \,ms$ में $3 \,A$ से बदलकर $2 \,A$ हो जाती है,तो एक स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) द्वारा $5 \,V$ का $e.m.f.$ उत्पन्न होता है। स्व-प्रेरकत्व का मान क्या है?

दिए गए परिपथ में, यदि $dI/dt = -1 \text{ A/s}$ है, तो इस क्षण पर $V_{AB}$ का मान क्या होगा ($\text{ V}$ में)?

$R$ त्रिज्या वाले एक परिनालिका (solenoid) में प्रति इकाई लंबाई $n$ फेरे हैं। परिनालिका का प्रति इकाई लंबाई स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) क्या है?

एक सीधे चालक का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) होता है

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