हाइड्रोजन के $(i)$ इलेक्ट्रॉन न्यून,$(ii)$ इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध और $(iii)$ इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिकों से आप क्या समझते हैं? उपयुक्त उदाहरणों के साथ औचित्य सिद्ध कीजिए।

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(N/A) आणविक हाइड्राइडों को उनकी लुईस संरचनाओं में इलेक्ट्रॉनों और बंधों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
$(i)$ इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड: इनमें पारंपरिक लुईस संरचना लिखने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं। उदाहरण: डाइबोरेन $(B_{2}H_{6})$। समूह $13$ के तत्व ऐसे यौगिक बनाते हैं और लुईस अम्ल (इलेक्ट्रॉन स्वीकर्ता) के रूप में कार्य करते हैं।
$(ii)$ इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड: इनमें उनकी पारंपरिक लुईस संरचनाओं को लिखने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की सटीक संख्या होती है। उदाहरण: $CH_{4}$। समूह $14$ के तत्व ऐसे यौगिक बनाते हैं,जो आमतौर पर चतुष्फलकीय ज्यामिति प्रदर्शित करते हैं।
$(iii)$ इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड: इनमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्मों (lone pairs) के रूप में मौजूद होते हैं। उदाहरण: समूह $15-17$ के तत्व ऐसे यौगिक बनाते हैं (जैसे,$NH_{3}$ में $1$,$H_{2}O$ में $2$ और $HF$ में $3$ एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं)। वे लुईस क्षार (इलेक्ट्रॉन दाता) के रूप में कार्य करते हैं और हाइड्रोजन बंध बना सकते हैं।

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