(N/A) अभिक्रिया की आण्विकता को एक प्रारंभिक अभिक्रिया में भाग लेने वाली उन अभिक्रियाशील प्रजातियों (परमाणु,आयन या अणु) की कुल संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है,जिन्हें रासायनिक परिवर्तन लाने के लिए एक साथ टकराना आवश्यक है।
$(a)$ एक-आण्विक अभिक्रिया: इसमें केवल एक अभिक्रियाशील प्रजाति शामिल होती है।
उदाहरण: अमोनियम नाइट्राइट का अपघटन: $NH_4NO_2(s) \rightarrow N_2(g) + 2H_2O(g)$
$(b)$ द्वि-आण्विक अभिक्रिया: इसमें दो अभिक्रियाशील प्रजातियों के बीच एक साथ टक्कर शामिल होती है।
उदाहरण: हाइड्रोजन आयोडाइड का वियोजन: $2HI(g) \rightarrow H_2(g) + I_2(g)$
$(c)$ त्रि-आण्विक अभिक्रिया: इसमें तीन अभिक्रियाशील प्रजातियों के बीच एक साथ टक्कर शामिल होती है।
उदाहरण: $2NO(g) + O_2(g) \rightarrow 2NO_2(g)$
तीन से अधिक आण्विकता वाली अभिक्रियाएं बहुत दुर्लभ होती हैं क्योंकि तीन से अधिक अणुओं के एक साथ टकराने की संभावना अत्यंत कम होती है।