जब $H_2S$ गैस को एक निश्चित विलयन में प्रवाहित किया जाता है,तो यह अभिक्रिया करके एक सफेद अवक्षेप बनाता है। उल्लेखित विलयन में किनके आयन होते हैं?

  • A
    लेड $(Pb^{2+})$
  • B
    जिंक $(Zn^{2+})$
  • C
    कॉपर $(Cu^{2+})$
  • D
    निकल $(Ni^{2+})$

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$25^\circ C$ पर $BaSO_4$ के संतृप्त विलयन की सांद्रता $4 \times 10^{-5} \ M$ है। इस तापमान पर $0.1 \ M \ Na_2SO_4$ में $BaSO_4$ की विलेयता क्या होगी?

नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन $I$: $BaCl_2$ के संतृप्त विलयन से कमरे के तापमान पर $HCl_{(g)}$ प्रवाहित करने पर सफेद धुंधलापन (turbidity) दिखाई देता है।
कथन $II$: जब $NaCl$ के संतृप्त विलयन से $HCl$ गैस प्रवाहित की जाती है,तो सम-आयन प्रभाव (common ion effect) के कारण सोडियम क्लोराइड अवक्षेपित हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनिए:

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

संतृप्त $BaCl_2$ विलयन में सांद्र $HCl$ मिलाने पर $BaCl_2$ अवक्षेपित हो जाता है; क्योंकि

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