$M/2$ द्रव्यमान का एक उपग्रह पृथ्वी की सतह से $R/3$ की ऊँचाई पर एक वृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है। उपग्रह का कोणीय संवेग $M \sqrt{\frac{GMR}{x}}$ है। $x$ का मान . . . . . . है,जहाँ $M$ और $R$ क्रमशः पृथ्वी का द्रव्यमान और त्रिज्या हैं। ($G$ गुरुत्वाकर्षण नियतांक है)

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एक उपग्रह एक ग्रह के चारों ओर उसकी सतह के निकट एक वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। मान लीजिए $\rho$ औसत घनत्व है और $R$ ग्रह की त्रिज्या है। तो उपग्रह का आवर्तकाल क्या होगा? ($G=$ सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक)

पृथ्वी की सूर्य से अधिकतम और न्यूनतम दूरी क्रमशः ${r_1}$ और ${r_2}$ है। जब पृथ्वी सूर्य से खींची गई मुख्य अक्ष के लंबवत स्थिति में हो,तो सूर्य से उसकी दूरी क्या होगी?

भूस्थिर उपग्रह की कक्षा वृत्ताकार है। उपग्रह का आवर्तकाल $(i)$ उपग्रह का द्रव्यमान,$(ii)$ पृथ्वी का द्रव्यमान,$(iii)$ कक्षा की त्रिज्या,और $(iv)$ पृथ्वी की सतह से उपग्रह की ऊँचाई पर निर्भर करता है।

उपग्रह का पलायन वेग क्यों नहीं होता है?

केंद्र से $r$ दूरी पर परिक्रमा कर रहे एक उपग्रह का कक्षीय कोणीय संवेग $L$ है। यदि दूरी को बढ़ाकर $16r$ कर दिया जाए,तो नया कोणीय संवेग क्या होगा?

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