धारा $I$ एक घन के चार किनारों (चित्र $-a$) से बने पथ $ABCDA$ के अनुदिश बह रही है,जो घन के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र $B_0$ उत्पन्न करती है। छह किनारों $ABCGHEA$ (चित्र $-b$) के पथ के अनुदिश बहने वाली धारा $I$ द्वारा घन के केंद्र पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र $B$ ज्ञात कीजिए।

  • A
    $\sqrt{\frac{3}{2}} B_0$ कोने $G$ की ओर
  • B
    $\sqrt{3} B_0$ कोने $E$ की ओर
  • C
    $\sqrt{\frac{3}{2}} B_0$ कोने $H$ की ओर
  • D
    $\sqrt{3} B_0$ कोने $F$ की ओर

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$R$ त्रिज्या वाली एक वृत्ताकार धारावाही कुंडली के केंद्र से उसकी अक्ष पर कितनी दूरी पर चुंबकीय प्रेरण का मान केंद्र पर इसके मान का $\frac{1}{8}$ गुना हो जाएगा?

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तार $PQ$ का एक रैखिक छोटा भाग $y$-अक्ष पर $y = -a/2$ से $y = +a/2$ तक स्थित है और इसमें $I$ धारा प्रवाहित हो रही है। तार $PQ$ के कारण बिंदु $y = +a$ पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र होगा:

$14\,A$ की धारा ले जाने वाले एक सीधे तार को चित्र में दिखाए अनुसार $2.2\,cm$ त्रिज्या के अर्धवृत्ताकार चाप में मोड़ा गया है। चाप के केंद्र $(O)$ पर धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र $.........\,\times 10^{-4}\,T$ है।

कथन: विद्युत परिपथों में,विपरीत दिशाओं में धारा ले जाने वाले तारों को अक्सर एक साथ मरोड़ दिया जाता है (twisted).
कारण: यदि तारों को एक साथ नहीं मरोड़ा जाता है,तो तारों का संयोजन एक धारा लूप बनाता है,और लूप द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र आस-पास के परिपथों या घटकों को प्रभावित कर सकता है।

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