यदि किसी कुंडली में बहने वाली धारा को उसके प्रारंभिक मान के आधे तक कम कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित नई ऊर्जा $(E_2)$ और मूल ऊर्जा $(E_1)$ के बीच का संबंध क्या होगा?

  • A
    $E_2 = \frac{E_1}{4}$
  • B
    $E_2 = \frac{E_1}{2}$
  • C
    $E_2 = E_1$
  • D
    $E_2 = 4E_1$

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दो परिपथ $A$ और $B$ को समान $d.c.$ स्रोतों से जोड़ा गया है,जिनमें से प्रत्येक का $e.m.f.$ $10 \ V$ है। परिपथ $A$ और $B$ के स्व-प्रेरकत्व क्रमशः $L_A = 10 \ H$ और $L_B = 10 \ mH$ हैं। प्रत्येक परिपथ का कुल प्रतिरोध $40 \ \Omega$ है। धारा को स्थिर मान तक पहुँचाने के लिए परिपथ $A$ और परिपथ $B$ में खपत ऊर्जा का अनुपात क्या है?

जब एक प्रेरक (inductor) में धारा $60\, mA$ होती है,तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $25\, mJ$ होती है। इस प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) ......$H$ है।

$L$ हेनरी के स्व-प्रेरकत्व वाले और $I$ एम्पियर की धारा प्रवाहित करने वाले एक प्रेरक (inductor) में संचित ऊर्जा है:

धारावाही कुंडली (current carrying coil) में ऊर्जा किस रूप में संचित होती है?

जब $4 \ mA$ की धारा एक प्रेरक (inductor) से गुजरती है,यदि इससे जुड़ा फ्लक्स $32 \times 10^{-6} \ T \ m^2$ है,तो प्रेरक में संचित ऊर्जा है

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