जब किसी वस्तु की स्थिति निर्धारित करने के लिए प्रकाश पुंज का उपयोग किया जाता है,तो अधिकतम सटीकता तब प्राप्त होती है यदि प्रकाश

  • A
    ध्रुवीकृत हो
  • B
    अधिक तरंगदैर्ध्य का हो
  • C
    कम तरंगदैर्ध्य का हो
  • D
    उच्च तीव्रता का हो

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मानव आँख की पुतली का व्यास लगभग $2 \, mm$ है। मानव आँख $555 \, nm$ की तरंगदैर्ध्य के लिए सबसे अधिक संवेदनशील है। मानव आँख की विभेदन सीमा (limit of resolution) ....... $min$ है।

जब $6000 \, \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है,तो एक सूक्ष्मदर्शी (microscope) में $0.05 \, mm$ की दूरी पर स्थित दो बिंदुओं को ठीक से देखा जा सकता है। यदि $3000 \, \mathring{A}$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है,तो विभेदन सीमा (limit of resolution) ........... $mm$ हो जाएगी।

एक सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक (objective) $30^o$ के अर्ध-शीर्ष कोण (semi-vertex angle) वाले शंकु पर प्रकाश एकत्र करता है और $5500 \text{ Å}$ तरंगदैर्ध्य के दृश्य प्रकाश का उपयोग करता है। इसकी विभेदन सीमा (resolving limit) क्या है?

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $A$ के रूप में और दूसरे को कारण $R$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $A$: एक इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी की तुलना में बेहतर विभेदन क्षमता (resolving power) प्राप्त कर सकता है।
कारण $R$: इलेक्ट्रॉन गन से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य, दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से बहुत कम होती है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

एक टेलीस्कोप की विभेदन क्षमता (resolving power) अधिक होने के लिए,

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