द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता का समीकरण लिखिए।

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(N/A) अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रस्तावित द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता का सिद्धांत बताता है कि द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे में परिवर्तनीय हैं। इसका समीकरण $E = mc^2$ है,जहाँ $E$ ऊर्जा है,$m$ द्रव्यमान है,और $c$ निर्वात में प्रकाश की गति है $(c \approx 3 \times 10^8 \ m/s)$।

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नाभिकीय ऊर्जा स्तरों और परमाणु ऊर्जा स्तरों के अंतरालों के क्रम का अनुपात है

$M_p$ एक प्रोटॉन के द्रव्यमान को दर्शाता है और $M_n$ एक न्यूट्रॉन के द्रव्यमान को। $B$ बंधन ऊर्जा वाले एक नाभिक में $Z$ प्रोटॉन और $N$ न्यूट्रॉन हैं। नाभिक का द्रव्यमान $M(N, Z)$ किसके द्वारा दिया जाता है? ($c$ प्रकाश का वेग है):

ड्यूटेरॉन $(_{1}^{2}H)$ और $\alpha -$ कण $(_{2}^{4}He)$ के लिए प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा क्रमशः $x_1$ और $x_2$ है। अभिक्रिया $_{1}^{2}H + {}_{1}^{2}H \to {}_{2}^{4}He + Q$ में मुक्त ऊर्जा $(Q)$ है

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$_1H^2$,$_2He^4$,$_{26}Fe^{56}$ और $_{92}U^{235}$ की बंधन ऊर्जा क्रमशः $2.22 \ MeV$,$28.3 \ MeV$,$492 \ MeV$ और $1786 \ MeV$ है। कौन सा नाभिक सबसे अधिक स्थिर है?

कथन: एक नाभिक की क्षय प्रक्रिया में, उत्पादों का द्रव्यमान जनक नाभिक के द्रव्यमान से कम होता है।
कारण: उत्पादों की विराम द्रव्यमान ऊर्जा जनक नाभिक की विराम द्रव्यमान ऊर्जा से कम होनी चाहिए।

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