$2 \ H$ प्रेरकत्व वाले एक परिनालिका (solenoid) में $1 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका में संचित चुंबकीय ऊर्जा कितनी है ($J$ में)?

  • A
    $1$
  • B
    $2$
  • C
    $4$
  • D
    $0.5$

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यदि किसी कुंडली में बहने वाली धारा को उसके प्रारंभिक मान के आधे तक कम कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित नई ऊर्जा $(E_2)$ और मूल ऊर्जा $(E_1)$ के बीच का संबंध क्या होगा?

जब एक प्रेरक (inductor) में विद्युत धारा $70 \ mA$ होती है, तो उसमें संचित चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा $49 \ mJ$ होती है। प्रेरक का प्रेरकत्व (inductance) क्या है ($H$ में)?

जब $4 \ mA$ की धारा एक प्रेरक (inductor) से गुजरती है,यदि इससे जुड़ा फ्लक्स $32 \times 10^{-6} \ T \ m^2$ है,तो प्रेरक में संचित ऊर्जा है

$4\,\mu H$ प्रेरकत्व वाले एक प्रेरक में $2\,A$ की धारा प्रवाहित होने पर उसमें संचित चुंबकीय ऊर्जा कितनी होगी?

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

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