$4.8 \ cm$ त्रिज्या का एक चांदी का गोला निर्वात कक्ष में एक धागे से लटका हुआ है। $200 \ nm$ तरंगदैर्ध्य का $UV$ प्रकाश कुछ समय के लिए गोले पर आपतित होता है,जिसके दौरान कुल $1 \times 10^{-7} \ J$ ऊर्जा सतह पर गिरती है। यह मानते हुए कि औसतन $10^3$ आपतित फोटॉनों में से एक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने में सक्षम है,गोले पर विभव ............ $V$ होगा।

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$v$ आवृत्ति का प्रकाश $v_0$ देहली आवृत्ति वाली सामग्री पर गिरता है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा किसके समानुपाती होती है?

$4000 \ \mathring A$ तरंगदैर्ध्य का प्रकाश एक प्रकाश-संवेदी सतह पर आपतित होता है। यदि उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को रोकने के लिए $-2 \ V$ के विभव की आवश्यकता होती है,तो पदार्थ का कार्य फलन (work function) क्या होगा ($eV$ में)? $(h = 6.6 \times 10^{-34} \ J \cdot s, e = 1.6 \times 10^{-19} \ C, c = 3 \times 10^8 \ m/s)$

दी गई आकृति एक निश्चित धातु के लिए प्रकाश-विद्युत प्रभाव प्रयोग में कुछ डेटा बिंदुओं को दर्शाती है। इसकी सतह से इलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन के लिए न्यूनतम ऊर्जा $....... eV$ है। (प्लांक नियतांक $h = 6.62 \times 10^{-34} \, J \cdot s$)

जब $8\ eV$ ऊर्जा वाला एक फोटॉन $1.6 \times 10^{15}\ Hz$ की देहली आवृत्ति वाली धातु की सतह पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ............ $eV$ होती है। $(h = 6.6 \times 10^{-34}\ J\cdot s, 1\ eV = 1.6 \times 10^{-19}\ J)$

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यदि $Na$ धातु का कार्य फलन $2.3 \ eV$ है,तो इसकी देहली तरंगदैर्ध्य $EM$ स्पेक्ट्रम के किस क्षेत्र में स्थित होगी?

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